क्या सरकारी योजनाओं से उठ गया लोगों का भरोसा? टोंक के शिविर ने खोल दी पोल
अग्निशमन केंद्र परिसर में गुरुवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी शहरी सेवा शिविर-2026 योजना के तहत जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं। कलेक्टर से लेकर एसडीएम और नगर परिषद आयुक्त तक मौके पर मौजूद थे। विभागों के अधिकारी-कर्मचारी अपने-अपने काउंटरों पर तैनात थे। व्यवस्थाओं में कोई कमी दिखाई नहीं दे रही थी।
लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसा था जो पूरे आयोजन से गायब था। वह थी आमजन की मौजूदगी।
सुबह से इंतजार… लेकिन नहीं पहुंचे लोग
शिविर शुरू होते ही विभिन्न विभागों के काउंटर सज गए। कर्मचारी आवेदन लेने और समस्याएं सुनने के लिए तैयार बैठे रहे। अधिकारियों ने भी लगातार निरीक्षण किया, लेकिन समय बीतता गया और अधिकांश काउंटरों पर कुर्सियां खाली ही नजर आती रहीं।
ऐसा लग रहा था मानो प्रशासन किसी का इंतजार कर रहा हो, लेकिन वह इंतजार पूरा नहीं हो रहा था।
आखिर लोग आए तो सिर्फ एक जगह
दिलचस्प बात यह रही कि जहां अधिकांश विभागों के काउंटर सूने रहे, वहीं पट्टा और भूमि संबंधी कार्यों वाले काउंटरों पर लोगों की आवाजाही दिखाई दी। इससे एक बड़ा सवाल उभरकर सामने आया कि क्या लोगों को केवल जमीन से जुड़े कामों में ही रुचि है या फिर बाकी योजनाएं अभी भी आमजन तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं?
महिला सशक्तिकरण की तस्वीर तो दिखी, लेकिन…
प्रशासन ने महिला सशक्तिकरण का संदेश देने के लिए विभिन्न काउंटरों पर महिला कर्मचारियों की तैनाती की थी। महिला कार्मिक पूरे समय मौजूद रहीं, लेकिन उनके सामने लाभार्थियों की संख्या बेहद कम रही।
तस्वीरें तो सशक्तिकरण की थीं, मगर उनमें जनसहभागिता का रंग नजर नहीं आया।
क्या लोगों तक पहुंची ही नहीं जानकारी?
स्थानीय लोगों से बातचीत में एक सवाल बार-बार सामने आया—क्या शिविर की जानकारी पर्याप्त रूप से लोगों तक पहुंची थी?
कई लोगों का कहना है कि उन्हें आयोजन की जानकारी समय पर नहीं मिली। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सरकारी शिविरों में मिलने वाली सुविधाओं और उनके लाभों के बारे में प्रभावी जागरूकता नहीं बनाई जाती।
यदि ऐसा है, तो फिर करोड़ों रुपये की योजनाएं और प्रशासनिक तैयारियां आखिर किसके लिए हैं?
सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है…
कलेक्टर मौजूद थीं।
एसडीएम मौजूद थे।
नगर परिषद आयुक्त मौजूद थे।
विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद थे।
फिर आखिर वह कौन-सी कड़ी थी जो गायब रह गई?
क्या लोगों का भरोसा कम हो रहा है?
क्या प्रचार-प्रसार पर्याप्त नहीं था?
या फिर योजनाएं कागजों से निकलकर लोगों तक पहुंच ही नहीं पा रही हैं?
शहरी सेवा शिविर-2026 का यह दृश्य कई सवाल छोड़ गया है। सवाल सिर्फ खाली काउंटरों का नहीं है, सवाल उस दूरी का है जो सरकार और आमजन के बीच कहीं न कहीं अब भी बनी हुई दिखाई देती है।
और जब तक इस दूरी की असली वजह सामने नहीं आती, तब तक ऐसे शिविरों की सफलता पर प्रश्नचिह्न बना रहेगा।
