दूनी। एक तरफ देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल इंडिया की बात कर रहा है…
दूसरी तरफ राजस्थान के कई कस्बों और गांवों में गौवंश आज भी प्लास्टिक और कचरा खाकर दम तोड़ने को मजबूर है।
दूनी नगर पालिका क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें और हालात कई बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में वर्षों नहीं बल्कि दशकों से कचरा प्रबंधन की समस्या बनी हुई है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चरागाह भूमि तक को कथित रूप से कचरा डालने की जगह बना दिया गया है।
“देश AI और रोबोटिक्स की दौड़ में आगे बढ़ रहा… लेकिन क्या हम अपनी आस्था बचाने में पीछे छूट गए हैं?”


चरागाह बना ‘डंपिंग जोन’?
ग्रामीणों का आरोप है कि:
- खुले में जगह-जगह कचरा डाला जा रहा है
- प्लास्टिक और गंदगी के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं
- भूखी गायें इन्हीं ढेरों में भोजन तलाशती हैं
- धीरे-धीरे प्लास्टिक निगलने से उनकी मौत हो रही है
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है।
हर बार स्थायी डंपिंग यार्ड और सफाई व्यवस्था के वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

“दो साल लगेंगे… तीन साल लगेंगे…”ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पालिका से कई बार स्थायी समाधान की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला।
सबसे बड़ा सवाल अब यही उठ रहा है:
जब तक योजनाएं बनेंगी, तब तक इन बेजुबान जानवरों का क्या होगा?
गौ रक्षा सिर्फ नारों तक सीमित ?
देशभर में गौ रक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें होती हैं।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीति तक गौ माता का नाम लिया जाता है।
लेकिन दूनी जैसे इलाकों की तस्वीरें एक अलग हकीकत दिखाती हैं —
जहाँ गायें प्लास्टिक खाकर बीमार पड़ रही हैं और चरागाह भूमि कचरे में तब्दील होती जा रही है।

पर्यावरण और आस्था दोनों पर संकट
विशेषज्ञों के अनुसार:
- प्लास्टिक खाने से गौवंश गंभीर बीमारियों का शिकार होता है
- खुले में कचरा फैलने से संक्रमण बढ़ता है
- चरागाह खत्म होने से पशुओं के लिए भोजन संकट गहराता है
यह सिर्फ पशुओं का नहीं, बल्कि पूरे गांव के स्वास्थ्य और पर्यावरण का मुद्दा बन चुका है।
अब क्या करे प्रशासन ?
स्थानीय लोगों की मांग है कि:
- स्थायी डंपिंग यार्ड बनाया जाए
- चरागाह भूमि पर कचरा डालना तुरंत बंद हो
- प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया जाए
- गौवंश संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की जाए
लोगों का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ सफाई व्यवस्था नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास की भी रक्षा करनी चाहिए।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं…
- आखिर दशकों से यह समस्या क्यों बनी हुई है?
- चरागाह भूमि तक कचरा पहुंचा कैसे?
- क्या सिर्फ योजनाओं और बैठकों से गौवंश बच पाएगा?
- AI और स्मार्ट इंडिया के दौर में क्या गांवों की यह तस्वीर शर्मनाक नहीं?
गांव वालों से अपील
✅ कचरा खुले में न फेंके
✅ प्लास्टिक का उपयोग कम करें
✅ चरागाह भूमि को बचाने में सहयोग करें
✅ गौवंश संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाएं






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